भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना’ ने पारंपरिक कारीगरों के जीवन को नई दिशा देने का वादा किया है। इस योजना के तहत जुड़ने वाले लाखों लाभार्थी आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और बाजार पहुंच जैसी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। यदि आप भी उन पारंपरिक हस्तशिल्पकारों में से हैं जो अपनी कला को संरक्षित रखना चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकती है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि योजना क्या है, कौन इसमें शामिल हो सकता है और क्या-क्या फायदे मिलेंगे।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना का उद्देश्य
केंद्र सरकार द्वारा संचालित यह योजना पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसका मुख्य लक्ष्य देश के उन कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है जो पीढ़ियों से हस्तनिर्मित उत्पाद बना रहे हैं। योजना के अंतर्गत न केवल वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, बल्कि आधुनिक कौशल प्रशिक्षण, सस्ते ऋण और विपणन सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। अब तक लाखों कारीगर इससे जुड़ चुके हैं, और सरकार का दावा है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।
कौन हैं पात्र लाभार्थी
योजना में शामिल होने के लिए कोई जटिल शर्तें नहीं हैं। यदि आप निम्नलिखित श्रेणियों में से किसी में आते हैं, तो आप आसानी से पंजीकरण करा सकते हैं। सरकार ने 18 प्रमुख पारंपरिक व्यवसायों को लक्षित किया है, जिनमें शामिल हैं:
- हस्तशिल्प और धातु कार्य से जुड़े कारीगर: जैसे अस्त्रकार (हथियार निर्माता), लोहार (लोहा गढ़ने वाले), ताला-निर्माता और हथौड़ा-टूलकिट बनाने वाले।
- पत्थर और मूर्ति कला के विशेषज्ञ: पत्थर तराशने वाले, मूर्तिकार और पत्थर तोड़ने वाले।
- बुनाई और हस्तनिर्मित उत्पाद: टोकरी, चटाई या झाड़ू बनाने वाले, साथ ही गुड़िया-खिलौना निर्माता।
- सेवा-आधारित कारीगरी: नाई (सौंदर्य विशेषज्ञ), धोबी, दर्जी और राजमिस्त्री।
- जल और समुद्री उत्पाद: नाव निर्माता और मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले।
- चमड़ा और अन्य शिल्प: मोची (जूता-चप्पल बनाने वाले) और मालाकार (मिट्टी के बर्तन बनाने वाले)।
ये कारीगर ऑनलाइन पोर्टल या नजदीकी केंद्रों पर जाकर पंजीकरण करा सकते हैं। पात्रता की पुष्टि के बाद तुरंत लाभ शुरू हो जाते हैं।
क्या-क्या लाभ मिलेंगे
पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़ने पर कारीगरों को ढेरों आर्थिक और व्यावहारिक फायदे नसीब होते हैं। प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- कौशल सम्मान राशि: प्रारंभिक पंजीकरण पर 15,000 रुपये तक की एकमुश्त सहायता।
- सस्ते ऋण: 1 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण टूलकिट खरीदने के लिए, और बाद में 3 लाख तक का क्रेडिट सपोर्ट।
- प्रशिक्षण और उपकरण: मुफ्त कौशल विकास कार्यक्रम, जिसमें आधुनिक टूल्स और डिजाइन ट्रेनिंग शामिल।
- बाजार पहुंच: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उत्पाद बेचने की सुविधा, साथ ही ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता।
- बीमा कवर: स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा, जो कारीगरों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
ये लाभ न केवल व्यक्तिगत स्तर पर मदद करते हैं, बल्कि समुदाय-स्तरीय सहकारी समितियों के माध्यम से सामूहिक विकास को बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का मजबूत स्तंभ बनेगी, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
यदि आप पात्र हैं, तो देर न करें—सरकारी वेबसाइट pmvishwakarma.gov.in पर जाकर आवेदन करें। यह योजना न केवल आपकी कला को संरक्षित करेगी, बल्कि आपके परिवार के भविष्य को भी चमका देगी। अधिक जानकारी के लिए नजदीकी ब्लॉक कार्यालय से संपर्क करें